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सिंगरौली जिले के जनपद बैढन के अंतर्गत करसुआ राजा में एक सड़क ऐसी भी जहां जान जोखिम में डालकर लोग चलने को मजबूर
August 3, 2020 • रिटर्न विश्वकाशी न्यूज (आर वी न्यूज लाइव )

सिंगरौली जिले के जनपद बैढन के अंतर्गत करसुआ राजा में एक सड़क ऐसी भी जहां जान जोखिम में डालकर लोग चलने को मजबूर

आर वी न्यूज़ संवाददाता-संदीप शाहवाल माडा सिंगरौली

हम बात कर रहे हैं सिंगरौली जिले के जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत क्षेत्र करसुआ राजा यहां मेन सड़क मलगा मोड़ से आगे कैलाश साह के घर के पास लगभग 100 मीटर इतनी बुरी तरह टूट गई है की आवागमन पूरी तरह से बंद होता नजर आ रहा है इस सड़क पर मानो अगर कोई चले तो अपनी जिंदगी और मौत के बीच खेल खेलकर के चलता है 3 से 4 फीट गड्ढे और उसमें भरे पानी और कीचड़ जिससे सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है फिर भी लोगों की मजबूरियां है कि उस पर चलना ही पड़ता है क्योंकि अगर चलेंगे नहीं तो बाजार कैसे जाएंगे रोजमर्रा की चीजें कैसे खरीदेंगे तमाम तरह की समस्याएं लोगों को झेलना पड़ रहा है

आए दिन होती रहती हैं घटनाएं

यह जो खाई नुमा सड़क बनी हुई है इसमें आए दिन कोई न कोई राहगीर गिरता रहता है यही नहीं राजस्व विभाग की अधिकारी बीच सड़क में गिर चुके हैं फिर भी उन्होंने सड़क के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया और न हीं प्रशासन को इस से अवगत कराया गया इस रोजमर्रा की भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए यह सड़क ही एकमात्र सहारा है

बहुत से गांव और बाजारों को जोड़ती है ये सड़क

यह सड़क बहुत से बाजारों को भी जोड़ती है जैसे रजमिलान मार्ग बाजार,कोयलखुद बाजार, बेतरिया बाजार और बहुत से गांव को इस सड़क के माध्यम से राहगीरों को होकर गुजरना पड़ता है लेकिन कहते हैं ना जब मजबूरियां सामने हो तो उस समय जाना पड़ता है

किसी दिन बड़े हादसे की है आशंका

इस सड़क में बने गड्ढों के माध्यम से किसी दिन राहगीरों को बहुत ही बड़े हादसे का शिकार होना पड़ सकता है क्योंकि जो व्यक्ति उस रास्ते से गुजरता है वह जान जोखिम पर डालकर के चलता है आए दिन हो रहे सड़क दुर्घटनाओं में ये सड़क कम नहीं है किसी दिन बहुत बड़ी अनहोनी की आशंका जताई जा रही है

कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं किये सड़क का मुआयना

ग्राम वासियों का कहना है कि चुनाव के समय नेताओं के बड़े-बड़े भाषण होते हैं बहुत से नेता बहुत भाषण देते हैं लेकिन इस सड़क को लेकर के बहुत से अधिकारियों और नेताओं से मौखिक बात की गई है लेकिन किसी ने नहीं सुनी हम लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस सड़क पर चलने को मजबूर हैं आखिर मजबूर भी क्यों ना रहे क्योंकि सिर्फ यही एक रास्ता है जो लोगों के चलने के लिए है